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Sunday, 1 November 2026

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JNU अस्पताल पर नवजात शिशु की अदला-बदली का आरोप, DNA जांच की मांग

जयपुर के खोहनागोरियान थाने में शिकायत, अस्पताल के रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की जांच की मांग

अस्पताल में भर्ती प्रसूता और विरोध करते परिजन

अस्पताल में भर्ती प्रसूता और विरोध करते परिजन

जयपुर के JNU अस्प्ताल में प्रसव के बाद नवजात शिशु को बदल देने के गंभीर आरोप लगे हैं। खोहनागौरियान थाने में पुलिस कंप्लेन दर्ज कराई गई है। प्रसूता और परिजनों का आरोप है कि पहले उन्हें डॉक्टर और फीमेल हेल्पर ने बेटा होने की बधाई दे दी। मिठाई के पैसे ले लिए,नवजात के जन्म की फाइल पर साइन कराए तो उसमें भी MALE लिखा दिखाया। कुछ ही मिनट बाद कहा कि आपको बेटी हुई है। इससे परिजन हैरान रह गए। ऐसे में अस्पताल में नवजात की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। खोहनागोरियान थाना क्षेत्र में प्रेमनगर निवासी निवासी कृष्ण मुरारी शर्मा ने पुलिस को शिकायत देकर अस्पताल में जन्मे नवजात शिशु की अदला-बदली की आशंका जताई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के साथ नवजात का DNA परीक्षण कराने और अस्पताल के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है।

प्रविष्टियों में काट-छांट और संशोधन

शिकायत के अनुसार, कृष्ण मुरारी शर्मा की पत्नी ममता देवी को प्रसव के लिए 6 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 6:30 बजे जयपुर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब 11:30 बजे प्रसव कराया गया। उनका आरोप है कि प्रसव के बाद उन्हें नवजात शिशु के संबंध में स्पष्ट और तत्काल जानकारी नहीं दी गई। बाद में अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराए गए मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अवलोकन करने पर उन्हें कुछ प्रविष्टियों में काट-छांट और संशोधन दिखाई दिए।

ओवरराइटिंग और बदलाव संदेह

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नवजात से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड में की गई कथित ओवरराइटिंग और बदलाव संदेह पैदा करते हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मूल मेडिकल रिकॉर्ड, डिलीवरी से संबंधित दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण कागजात उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन शिकायत के अनुसार तत्काल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।

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अस्पताल के कर्मचारियों की भूमिका

मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता ने अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रसव के समय से लेकर नवजात को परिजनों को सौंपे जाने तक की पूरी प्रक्रिया की CCTV फुटेज, डिलीवरी से संबंधित वीडियोग्राफी और अस्पताल के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की काट-छांट या बदलाव किया गया है तो उसके मूल दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएं और नवजात की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए DNA परीक्षण कराया जाए।

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