80 साल की बुजुर्ग महिला की गुहार, कब तक करना होगा न्याय के लिए इंतजार!
धोलाई में जमीन पर कथित कब्जे के प्रयास को लेकर FIR दर्ज, बुजुर्ग महिला ने अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने का किया दावा
पुलिस में एफआईआर, फिर भी परेशान है बुजुर्ग महिला
उम्र के उस पड़ाव पर, जब इंसान को सुकून और अपनों के साथ वक्त बिताने की जरूरत होती है, 80 वर्षीय नाना देवी अपनी जमीन के हक और न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। जयपुर के रामसिंहपुरा उर्फ धोलाई क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर उनकी शिकायत पर पत्रकार कॉलोनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि लंबे समय से शिकायतें करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद उनकी उम्मीदें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप
शिकायत के अनुसार, नाना देवी ने ग्राम रामसिंहपुरा उर्फ धोलाई, पटवार हल्का कल्याणपुरा, सांगानेर स्थित खाता संख्या 18 सहित अन्य भूमि पर अपना अधिकार होने का दावा किया है। आरोप है कि संबंधित भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा करने का प्रयास किया। शिकायत में जमीन पर कंटेनर रखने और भूमि से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी आपत्तियां उठाई गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
रात में 40 से 50 लोगों के पहुंचने का दावा
शिकायत में 9 अगस्त 2026 की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि रात के समय करीब 40 से 50 लोग भूमि पर पहुंचे और वहां कंटेनर रखकर कब्जे का प्रयास किया। शिकायतकर्ता पक्ष ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग भी की है। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना के समय मौके पर कौन-कौन मौजूद था और कथित कब्जे के प्रयास से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड का भी हवाला
नाना देवी पक्ष ने भूमि विवाद के संबंध में पुराने राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में हुई प्रशासनिक कार्यवाहियों का हवाला दिया है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 1992 में भूमि के नामांतरण को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला कलेक्टर के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। भूमि के स्वामित्व, नामांतरण और संबंधित आदेशों की वास्तविक कानूनी स्थिति अब जांच के दौरान रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत का दावा
बुजुर्ग महिला पक्ष का कहना है कि उन्होंने न्याय की मांग को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक सहित विभिन्न उच्च अधिकारियों तक अपनी शिकायतें पहुंचाईं। उनका आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद लंबे समय तक उन्हें राहत नहीं मिली। हालांकि, इन शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध एफआईआर से नहीं होती है। ऐसे में संबंधित शिकायतों, प्राप्तियों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
डीसीपी के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस उपायुक्त जयपुर दक्षिण के आदेश क्रमांक 29768, दिनांक 22 सितंबर 2026 के बाद प्रकरण दर्ज किया गया। एफआईआर में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच सहायक पुलिस आयुक्त, मानसरोवर हेमेन्द्र शर्मा को सौंपी गई है।
जांच पर टिकी बुजुर्ग महिला की उम्मीदें
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल भूमि के वास्तविक स्वामित्व, कथित कब्जे के प्रयास और पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों का है। क्या शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होंगे? क्या सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी? और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई
80 वर्षीय नाना देवी के लिए यह विवाद केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनके अनुसार अपने अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब उनकी उम्मीद निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई पर टिकी है। मामले में आरोपों की पुष्टि और किसी की जिम्मेदारी तय होना जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
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