ऊंटनी के दूध पर बीकानेर के वैज्ञानिकों का शोध 'पेटेंट'
खास तकनीक को मिली भारत सरकार से मान्यता
बीकानेर वेटरनरी विश्वविद्यालय
बीकानेर ने ऊंटनी के दूध की वैज्ञानिक उपयोगिता और उससे जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट मिला है। शोध के तहत ऊंटनी के दूध से प्राप्त प्रोटीन हाइड्रोलाइजेट के कार्यात्मक गुणों और जैव-सक्रिय क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष तकनीक विकसित की गई है।
वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि इस शोध में वैज्ञानिक डॉ. अनीता तंवर, डॉ. आर. के. बेरवाल, डॉ. योगेश कुमार और डॉ. अनिल हर्ष शामिल रहे। टीम ने प्रोटीन हाइड्रोलाइजेट का अध्ययन कर उसके गुणों और जैव-सक्रिय क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में तकनीकी नवाचार किया।
राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में ऊंट पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंटनी के दूध का कई इलाकों में पारंपरिक रूप से उपयोग भी होता रहा है। ऐसे में इसके पोषक और जैव-सक्रिय घटकों पर वैज्ञानिक शोध भविष्य में मूल्यवर्धन और नए उत्पादों के विकास में उपयोगी हो सकता है।
डॉ. सुमंत व्यास ने वैज्ञानिक टीम को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरव की उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध नवाचार और ऊंट आधारित वैज्ञानिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे।
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