Sunday, 2 August 2026

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विवाह से पहले शारीरिक संबंध बनाना खराब चरित्र की निशानी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

पुलिस भर्ती मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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चरित्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो वयस्क लोगों के बीच आपसी सहमति से बने विवाह-पूर्व संबंधों को किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस वजह से किसी की नैतिकता या चरित्र पर सवाल उठाना उचित नहीं है।


पुलिस भर्ती से जुड़ा था मामला


यह टिप्पणी तेलंगाना पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। उम्मीदवार का चयन होने के बाद उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। भर्ती बोर्ड का कहना था कि वह पहले एक आपराधिक मामले में आरोपी रह चुका है।


शादी का वादा और संबंधों को लेकर दर्ज हुआ था केस


मामले के अनुसार, उम्मीदवार पर आरोप था कि उसने पड़ोस में रहने वाली युवती से शादी का वादा कर लंबे समय तक संबंध बनाए, लेकिन बाद में किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया। यह मामला बाद में लोक अदालत में समझौते के जरिए समाप्त हो गया था।


'सहमति वाले संबंधों को गलत नजर से नहीं देखा जा सकता'

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कोर्ट ने कहा कि आज के समाज में विवाह-पूर्व संबंध असामान्य नहीं हैं। यदि दो अविवाहित वयस्क अपनी सहमति से संबंध बनाते हैं, तो इसे किसी के चरित्र या नैतिकता का पैमाना नहीं बनाया जा सकता।


कानून भी नहीं लगाता रोक


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो बालिग और अविवाहित लोगों को आपसी सहमति से संबंध रखने से रोकता हो। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों को सामाजिक पूर्वाग्रहों की बजाय कानूनी नजरिए से देखा जाना चाहिए।


क्यों है यह फैसला अहम?


सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां किसी व्यक्ति के निजी जीवन को आधार बनाकर उसके चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि सहमति से बने निजी संबंधों को नौकरी या सामाजिक प्रतिष्ठा के खिलाफ नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए।

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