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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब अपमान और असुरक्षा के साथ जीवन बिताना नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि बुजुर्ग माता-पिता को अपने घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार है। यदि बेटे या बहू के घर में रहने से वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण या सुरक्षा में बाधा आती है, तो उन्हें घर से बेदखल करने का आदेश दिया जा सकता है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने लखनऊ के रवि कांत गुप्ता से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। मामला उनकी 81 वर्षीय मां से जुड़ा था, जिन्हें घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहना पड़ा था। आरोप था कि उनके पोते के व्यवहार के कारण उन्हें घर में रहने में परेशानी हुई।
इस मामले में एसडीएम ने 15 नवंबर 2022 को बेटे को मकान से हटाने का आदेश दिया था। जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखा। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों आदेश रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आदेश जारी कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उपेक्षा और असुरक्षा से बचाना है।