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नीट पेपर लीक की सिलसिलेवार कहानी
NEET (UG) 2026 परीक्षा रद्द
सीकर से शुरू हुई NEET पेपर लीक की कहानी अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। जांच में सामने आया है कि असली पेपर नहीं, बल्कि एक “क्वेश्चन बैंक” छात्रों तक पहुंचा था। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सारे सवाल एक ही हैंडराइटिंग में लिखे गए थे।
पेपर लीक की सिलसिलेवार कहानी
कहानी की शुरुआत 1 मई से होती है। केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा चूरू का एक छात्र यह क्वेश्चन बैंक सीकर में अपने दोस्त को भेजता है। अगले ही दिन यानी 2 मई को यह क्वेश्चन बैंक सीकर के एक पीजी संचालक तक पहुंच जाता है। वहां से पीजी में रहने वाले छात्रों को यह सामग्री शेयर की जाती है। धीरे-धीरे यह दूसरे छात्रों, करियर काउंसलर्स और कोचिंग से जुड़े लोगों तक भी फैलने लगता है।
3 मई को जब NEET परीक्षा खत्म हुई, तब सीकर के ही एक अन्य पीजी संचालक को शक हुआ। उसने उद्योग नगर थाने और NTA को शिकायत देकर बताया कि बड़ी संख्या में छात्रों के पास एक ऐसा “क्वेश्चन बैंक” था, जो असली परीक्षा से काफी मिलता-जुलता है।
इसके बाद सोशल मीडिया और कोचिंग संस्थानों में इस क्वेश्चन बैंक की चर्चा तेजी से फैलने लगी। छात्र आपस में सवालों का मिलान करने लगे और शक गहराता गया। फिर 7 मई को NTA ने माना कि उसे परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े इनपुट मिले हैं। जांच में राजस्थान और उत्तराखंड का नाम सामने आया। मामला गंभीर होता देख 8 मई को पूरी जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई।
बड़ा सवाल, आखिर कहां से बना यह क्वेश्चन बैंक?
इसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने जांच शुरू की। लगातार छापेमारी और पूछताछ के बाद 12 मई तक सीकर और आसपास के इलाकों से 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह क्वेश्चन बैंक बना कहां से और असली पेपर तक इसकी पहुंच कैसे हुई? जांच एजेंसियां इसी कड़ी को जोड़ने में लगी हैं।यह भी पढ़ें