Sunday, 2 August 2026

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भारत-रूस बना रहे नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक ब्रह्मोस, दुश्मनों के लिए बढ़ेगी चुनौती

छोटी होगी, लेकिन ताकत कई गुना ज्यादा! नई ब्रह्मोस पर बड़ा खुलासा

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दुश्मन को संभलने का मौका नहीं!

BrahMos-II missiles:नई दिल्ली. ब्रह्मोस मिसाइल के लॉन्च के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए एक बहुत बड़ी खबर आई है। भारत और रूस मिलकर हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल का छोटा वर्जन बना रहे हैं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बुधवार को यह जानकारी दी। छोटा ब्रह्मोस मिलते ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं की मारक क्षमताओं में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। 

ब्रह्मोस मिसाइलों के लॉन्च के 25 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन थिंक टैंक में रूसी राजदूत ने भारत और रूस के इस साझा अभियान के बारे में बताया-

टैक्टिकल क्रूज मिसाइल ट्रायड पूरा'

उन्होंने कहा कि '2017 में ऐतिहासिक परीक्षण के बाद भारत ने टैक्टिकल क्रूज मिसाइल ट्रायड पूरा कर लिया, इसने ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया, जिसमें इस श्रेणी में दुनिया के सबसे तेज और बहुत ही भरोसेमंद प्रिसिजन स्ट्राइक की क्षमता है।'

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मौजूदा ब्रह्मोस से लगभग आधा वजन

ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों के नाम को मिलाकर पड़ा है।कुछ रिपोर्ट के अनुसार भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक मिसाइल के जिस नए वर्जन पर काम कर रहे हैं, उनका वजन लगभग 1.3 टन से 1.5 टन के बीच रहने की उम्मीद है।अभी जमीन और जल से लॉन्च किए जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का वजन लगभग 3 टन होता है।जबकि, एयर लॉन्च वर्जन 2,200 से 2,500 किलो के बीच है।हल्का होने के साथ-साथ ब्रह्मोस का यह वर्जन छोटा, ज्यादा स्मार्ट और स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस होगा।

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