childlessness-is-not...
मानसिक क्रूरता को माना वैध , 34.76 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश
पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि संतान न होना या लंबे समय तक IVF समेत अन्य उपचार के बावजूद बच्चा न होना, (बांझपन) अपने आप में तलाक का आधार नहीं बन सकता। हालांकि, कोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखा। मामला बक्सर के एक दंपती से जुड़ा है, जिनकी शादी 2010 में हुई थी। संतान प्राप्ति के लिए दोनों ने वर्षों तक फर्टिलिटी उपचार कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में रिश्तों में तनाव बढ़ा और पत्नी ने पति व उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य आपराधिक मामले दर्ज कराए। पति ने इन आरोपों को झूठा बताया।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस चंद्रशेखर झा की पीठ ने कहा कि इस मामले में वैवाहिक संबंधों में विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका था और दोनों के बीच लंबे समय तक चली आपराधिक मुकदमेबाजी व अन्य परिस्थितियां मानसिक क्रूरता को साबित करती हैं। कोर्ट ने पति को महिला को 34.76 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता दो किस्तों में देने का भी निर्देश दिया।