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नोटों की बोरी कहां से आई, नहीं बता पाए
जस्टिस यशवंत वर्मा
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में तीन सदस्यीय जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप सही पाए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समिति ने आगे कार्रवाई की सिफारिश की है और संसद के शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। जांच में सामने आया कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोररूम से 500 रुपये के नोटों के बंडल मिलने की संतोषजनक वजह और स्वामित्व को लेकर वह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। समिति ने इसे आरोप सिद्ध होने के आधारों में माना।
दूसरे आरोप में सबूतों के उचित संरक्षण में गंभीर खामी पाई गई। स्टोररूम की स्थिति में बदलाव और कुछ नोटों के उपलब्ध नहीं होने को लेकर भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि नोट जस्टिस वर्मा ने खुद हटाए। तीसरे आरोप में समिति ने 22 मार्च 2025 के उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना और उनके रुख को टालमटोल वाला बताया।
जस्टिस वर्मा अप्रैल में राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज चुके हैं। इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की सूची में है। महाभियोग प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
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