सनातन धर्म के ग्रंथों का होगा शुद्धिकरण
पतंजलि योगपीठ में 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन में उठा मुद्दा
पतंजलि योगपीठ में आयोजित 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों के मूल स्वरूप को सामने लाने और उनमें मिलावट को दूर करने की पहल शुरू होने जा रही है। पतंजलि योगपीठ में आयोजित 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को इस मुद्दे पर अहम निर्णय लिया गया। सम्मेलन में सनातन धर्म शास्त्र शुद्धिकरण समिति के गठन पर सहमति बनी।
संतों और विद्वानों ने किया मंथन
योगगुरु स्वामी रामदेव ने बताया कि समिति का उद्देश्य धर्मग्रंथों में हुई मिलावट और गलत व्याख्याओं को दूर कर उनके प्रामाणिक स्वरूप को स्थापित करना है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए प्रसारित हो रही भ्रामक धार्मिक जानकारियों को सुधारने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
सम्मेलन में अखिल भारतीय संत समिति, विभिन्न अखाड़ों, काशी विद्वत परिषद, अखिल भारतीय विद्वत परिषद, हिंदू महासभा और जगद्गुरु शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों सहित देशभर के संतों और संस्कृत विद्वानों ने भाग लिया।
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