विला के चक्कर में IAS शिखर और IPS प्रशाखा का करियर हिला
IAS शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी IPS प्रशाखा भी एपीओ, अनंता रिजॉर्ट वाले को फायदा पहुंचाने और राजस्व का नुकसान व नियम-कायदों को दरकिनार करने की जांच करेगी एसीबी, सीएम ने दी मंजूरी
राजस्थान के IAS शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर
सरकारी खजाना लुटाकर अपने लिए सस्ते में विला खरीदने के चक्कर में IAS शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर की करतूतों ने उनका करियर हिला कर रख दिया। एक तरफ IAS शिखर अग्रवाल के खिलाफ पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों के वारे-न्यारे करने और चहेतों को मुफ्त में सरकारी खजाना और जमीन लुटाने के आरोपों जांच एसीबी करेगी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दी है। दूसरी तरफ सरकार ने IAS शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को भी शनिवार दोपहर APO कर दिया। इस अफसर दंपत्ति के खिलाफ अनंता रिजाॅर्ट्स में सस्ते विला खरीदने और महंगे रेट पर अपने परिचित की कंपनी को लीज पर देने के मामले का एक अखबार की खबर से खुलासा हुआ था। इसके बाद शिखर अग्रवाल चौतरफा घिर गए है। उदयपुर कलेक्टर रहने के दौरान और इसके अलावा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और उद्योग एवं वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहते उनके किए गए कांड अब एक-एक कर सामने आ रहे हैं। अनुचित लाभ अर्जित करने और निवेश के नाम पर अपने चहेतों को जमीनों की बंदरबांट के आरोप हैं, ऐसे में अब राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो उन पर लगे गंभीर आरोपों में दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। बताया जा रहा है कि आईएएस शिखर और उनकी वाइफ प्रशाखा वर्तमान में अमेरिका हैं।
आईएएस शिखर अग्रवाल पर पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप
राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी श्री शिखर अग्रवाल द्वारा निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से कथित आपराधिक मिलीभगत कर अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए स्वयं एवं संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने के तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आए हैं। इस संबंध में राजस्थान सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के अंतर्गत विस्तृत जांच / अनुसंधान हेतु पूर्वानुमोदन प्रदान किया गया है
स्वयं एवं परिजनों के नाम रिसॉर्ट में संपत्तियां खरीदने के मामले में विस्तृत जांच को राज्य सरकार की मंजूरी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता ने बताया कि दैनिका भास्कर समाचार पत्र में प्रकाशित खबर तथा उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट का ब्यूरो द्वारा समग्र परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। इसके अतिरिक्त गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर सामने आए तथ्यों के संबंध में प्राथमिक जांच दर्ज कर विस्तृत जांच किया जाना उचित पाया गया।
गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड संचालित करता है 'अनंता' नाम से होटल एवं रिसॉर्ट
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापन के दौरान जिला कलेक्टर, उदयपुर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं अन्य विभागों के पदों पर रहते हुए कथित रूप से अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड, जिसके द्वारा 'अनंता' नाम से होटल एवं रिसॉर्ट संचालित किए जाते हैं, के निदेशकों से मिलीभगत कर कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण संबंधी शर्तों में अनुचित छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां तथा विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलयाकर अनुचित लाभ पहुंचाया।
करोड़ों के विला कौडियों में खरीदे गए
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि शिखर अग्रवाल द्वारा उक्त कंपनी के संचालकों से कथित मिलीभगत कर स्वयं एवं अपने परिजनों के नाम पर उदयपुर के बूझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसोर्ट में विला खरीदने गए। बूझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में मार्च 2026 में 20 विला तथा अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 16 विला खरीदे। बूझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में मार्च 2026 में 20 विलाउ शिखर अग्रवाल और पत्नी प्रशाखा के नाम पर 10-10 विला 15-15 लाख रुपए में खरीदे हैं, जबकि अलवर के अजबगढ़ के अनंता रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल एवं उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला 16.5-16.5 लाख रूपये में व, दोनों पुत्रों के नाम पर 4 विला लगभग 15-15 लाख तथा सास-ससुर के नाम पर 4 विला लगभग 16.5-16.5 लाख रूपये में खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों का क्रय कथित तौर पर बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर किया गया।
जिस दिन गोयल फैशन्स को रियायत दी, उसी दिन 20 विला की रजिस्ट्री कराई
इसी प्रकार गोपनीय सूत्रों से सामने आया है कि वित्त विभाग द्वारा प्राईवेट कंपनी गोयल फैशन्स प्राईवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जिस दिनांक 27.03.2026 को जारी किया गया, उसी दिनांक को शिखर अग्रवाल द्वारा 20 विला की रजिस्ट्री करवाई गई है। प्रथम दृष्टया यह भी प्रतीत हुआ कि शिखर अग्रवाल द्वारा अपने पदस्थापन के दौरान निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया तथा राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त स्वयं एवं परिजनों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के तथ्यों की भी विस्तृत जांच किया जाना आवश्यक पाया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए में विस्तृत जांच
उक्त तथ्यों के आधार पर राजस्थान सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के अंतर्गत विस्तृत जांच / अनुसंधान हेतु पूर्वानुमोदन प्रदान किया गया है। प्रकरण में शिखर अग्रवाल, आईएएस (तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग विभाग, राजस्थान), निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।
शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत ने की cbi-ed जांच की मांग
