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जयपुर की मुहाना मंडी के सामने स्थित बोनी ड्रीम्स प्रोजेक्ट का मामला, बिल्डर सड़क पर आ गया
धोखाधड़ी का शिकार बिल्डर अपनी दास्तां सुनाते हुए
जयपुर। आप ने प्लाॅट, मकान, दुकान बेचने वालों और बिल्डरों से परेशान लोग तो देखे होंगे, लेकिन जयपुर में एक ऐसा मामला आया है जिसमें फ्लैट खरीदने वालों ने बिल्डर के कर्मचारियों से सेटिंग करके नामचीन बिल्डर को ही बर्बाद कर दिया। जालसाजी में फंसे बिल्डर को जेल तक जाना पड़ गया। बिल्डर को करीब 13 करोड रुपए का फटका लगा है। मामला जयपुर की नामचीन रियर एस्टेट फर्म Bony buildtech private limited का है। मालिक को अपने नौकर-कर्मचारियों पर आंख मूंदकर विश्वास करना भारी पड़ गया। इस फर्म ने मुहाना मंडी जयपुर के पास 200 फ्लैट का प्रोजेक्ट बनाया था। फर्म में सेल्स, अकाउंट्स और बैक ऑफिस का काम देखने वाले कर्मचारियों ने फ्लैट्स के लिए एग्रीमेंट किसी और के साथ किए और सेल किसी और को करके बिल्डर को फंसा दिया। बिल्डर अपने कर्मचारियों पर आंख मूंद कर विश्वास कर रजिस्ट्रियां कराता गया। इस खेल में बिल्डर का खास नौकर शामिल था। उसने बुरी तरह फंसा दिया। जिनसे एडवांस लेकर फ्लैट बुकिंग की गई थी, फ्लैट उनको ना देकर कर्मचारियों ने दूसरे लोगों के नाम रजिस्ट्रियां करवा दी। सब कुछ इतनी सफाई से किया कि बिल्डर को अपने कर्मचारियों पर जरा भी शक नहीं हुआ। फ्लैट्स के एग्रीमेंट किसी और के नाम और रजिस्ट्री किसी और के नाम हुई तो मामला चर्चा में आ गया। एग्रीमेंट करने वालों ने एक-एक कर बिल्डर पर एफआईआर दर्ज कराना शुरू कर दिया। फर्म मालिक होने और रजिस्ट्री पर फोटो व साइन के चक्कर में बिल्डर को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया, कोर्ट ने जेल भेज दिया। जेल से छूट कर तब उसने खाते खंगाले। ऑडिट कराई, तो पता चला कि जिन लोगों के नाम फ्लैट की रजिस्ट्री कराई, उन्होंने रकम उसके खातों में डाली ही नहीं। कर्मचारियों ने सेंकड पार्टीज के नाम रजिस्ट्रियां करा दी और फ्लैट बिक्री से मिला पैसा खुद हड़प गए। पांच- दस हजार की नौकरी करने वाले उसके कर्मचारी आज लग्जरी गाडि़यों में घूम रहे हैं और बेचारा बिल्डर एग्रीमेंट वालों के आरोपों के चक्कर में कानून की मार भुगत रहा है। जिनका पेमेंट वास्तव में आया था, उनको प्रोपर्टी बेचकर पैसा लौटा रहा है। जिन लोगों को उसके कर्मचारियों ने मिलीभगत कर फ्लैट़्स की रजिस्ट्री करा दी, उनको अब उसने सबक सिखाने की ठान ली है। बिना पेमेंट आए फर्जी तरीके से रकम दिखाकर कराई गई रजिस्ट्रियां कैंसल कराने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। इतना ही नहीं उसने एक एक कर अपने कर्मचारी और उनके साथ मिलीभगत वाले 26 फ्लैट खरीददारों के बारे में जानकारी कर उनके खिलाफ पुलिस कंप्लेन कर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अपने ही मालिक को ऐसे बनाया बेवकूफ
बोनी बिल्डटेक के मालिक अजय सिंह ने बताया कि वह बिल्डर, वेल्यूअर, एस्टीमेटर और आर्किट्रैक्ट है। उसने वर्ष 2014 में मानसरोवर क्षेत्र में मुहाना मंडी के सामने मदारामपुरा में 200 फ्लैट्स के एक प्रोजेक्ट का नक्शा जेडीए से पास कराकर निर्माण किया था। रिद्धि-सिद्धि चौराहे पर उसका सेल्स ऑफिस था। पर्सनल नौकर नरसी के पास चेक बुक, कैश, चाबियां और अन्य सभी सामान रहता था। नरसी पर विश्वास करता था, लेकिन नरसी ऑफिस में सेल्स और अन्य काम देखने वाले धीरज, कपिल, अकाउंटेंट जयपाल सिंह ओर एक अन्य कर्मचारी आपस में गिराेह बनकर कुछ अन्य लोगों को साथ मिला लिया। जिन लोगों से फ्लैट बेचने के एग्रीमेंट किए थे, उनके स्थान पर अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्रियां करवा दी। चूंकि रजिस्ट्री में प्रथम पक्ष बिल्डर अजय सिंह है, दूसरा पक्ष कोई अन्य व्यक्ति है। जबकि फ्लैट बुकिंग के एग्रीमेंट अन्य लोगों को किए गए थे। रजिस्ट्रियों में लाखों रुपए बैंक खातों में प्राप्त होने का जिक्र किया, लेकिन ना चेक नंबर लिखे, ना ट्रांजेक्शन डिटेल। कर्मचारियों पर विश्वास कर अजय सिंह खरीददारों को रजिस्ट्री कराता गया। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। पता चला कि जिन लोगों के साथ एग्रीमेंट किया गया था, उनके स्थान पर कर्मचारियों ने किसी अन्य को उसी का आदमी, रिश्तेदार या वास्तविक खरीदार बताकर रजिस्ट्री करा धोखाधड़ी कर दी।
बिल्डर को जेल तक जाना पड़ गया
बिल्डर अजय सिंह को उसके कर्मचारियों ने ऐसा फंसाया कि उसे जेल तक जाना पड़ गया। कर्मचारियों ने पहले फ्लैट्स के एग्रीमेंट जिन लोगों ने नाम से किए, एडवांस रकम बैंक अकाउंट में ली, पजेशन के समय उनकी जगह किसी अन्य के नाम रजिस्ट्रियां करा दी। उनकी रजिस्ट्री में सिर्फ अमाउंट लिखा, जिसे अजय सिंह ने कर्मचारियों के कहने पर रजिस्ट्री करा दी। ऐसे में जिन लोगों को एग्रीमेंट किया और एडवांस बुकिंग अमाउंट खातों में दिया, उन्होंने पुलिस केस कर दिए। एक-एक कर केस दर्ज होते गए, अजय सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीछे से परिवार वालों को कर्मचारी डराते रहे और उनसे रकम या कोई सामान, प्रोपर्टी ऐंठते रहे। जब अजय सिंह जेल से जमानत पर बाहर आया, उसने अपने अकाउंट्स की ऑडिट कराई, तो पता चला जिन लोगों के नाम रजिस्ट्री हुई हैं, उनका पेमेंट तो उसके खातों में आया ही नहीं, फेक डिटेल्स रजिस्ट्री में लिखी गई। अब वह सभी रजिस्ट्रियों को निरस्त कराने की विधिक प्रक्रिया अपना रहे हैं।
कई ने फ्लैट्स को आगे सलटा दिया
इस पूरे मामले में अगर पुलिस समय से सहीं इन्वेस्टिगेशन करती तो पहले ही दूध का दूध पानी का पानी हो जाता। पुलिस अगर फ्लैट बुकिंग वालों के नंबर्स और रजिस्ट्री कराने वाले परचेजर्स को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर लेती और रकम के ट्रांजेक्शन को बैंक्स से वेरिफाई करा लेती तो मामला पहले ही पकड़ा जाता। जो अब ऑडिट कराने में पकड़ा गया है।धोखा देकर रजिस्ट्री कराए गए फ्लैट्स को अधिकतर ने आगे सलटा दिया। अब इन फ्लैट्स में तीसरा, चौथा या उसके भी बाद का खरीददार रहा रहा है, या उनका पजेशन है। ऐसे में धोखाधड़ी की चेन लंबी हो गई। अजय सिंह धोखा करने वाले कर्मचारियों और उनके साथ मिलकर फ्लैट खरीदने वालों को सबक सिखाना चाहते हैं। उन्होंने पुलिस के अलावा रेरा में भी कंप्लेन की है। बिल्डर की मांग है कि या तो इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री में मेंशन की गई रकम दिलायी जाए या फिर इन रजिस्ट्री को वैध घोषित कर निरस्त कराने की कार्रवाई की जाए।
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