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हीरावाला में प्लास्टर गिरने से छात्र-छात्रा घायल , सरकारी स्कूलों की बदहाली पर फिर उठे सवाल
बच्चों की जान से खिलवाड़
राजगंगा, बस्सी। बस्सी के हीरावाला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा में पढ़ाई के दौरान छत का प्लास्टर भर-भराकर गिर पड़ा और एक छात्र व एक छात्रा घायल हो गए। एक तरफ राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश, जिला कलेक्टर के आदेश और बस्सी एसडीएम की सख्ती के बीच जर्जर सरकारी स्कूलों का निरीक्षण युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने में जुटे हैं। सरकारी व्यवस्था की पोल खुल गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्कूल भवन इतने सुरक्षित थे तो बच्चे घायल कैसे हुए? और अगर भवन जर्जर थे तो उनमें पढ़ाई क्यों कराई जा रही थी? सरकारी आदेशों, निरीक्षणों और सुरक्षा प्रमाण पत्रों के बीच यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो अक्सर कार्रवाई हादसे के बाद करती है उससे पहले नहीं। वर्षों से जर्जर भवनों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कई जगह मरम्मत और नए निर्माण की रफ्तार अपेक्षाओं से पीछे होने की शिकायतें भी उठती रही हैं।
अब अभिभावकों का सवाल है कि क्या सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही प्राथमिकता है जितनी कागजों में दिखाई जाती है? आखिर कब तक बच्चे टूटती छतों और जर्जर कमरों के साए में पढ़ने को मजबूर रहेंगे? अब निगाहें इस बात पर हैं कि हीरावाला हादसे की जांच में जिम्मेदारी तय होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने यही है कि क्या निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा, या वास्तव में जर्जर विद्यालयों को बंद कर बच्चों के लिए सुरक्षित भवन उपलब्ध कराए जाएंगे? यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है।
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