Sunday, 2 August 2026

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पांचना की नहरों में पानी नहीं छोड़ा तो निर्णायक आंदोलन

सातवें दिन भी जारी रहा किसानों का जनसैलाब, निर्णायक आंदोलन की चेतावनी’’

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उमड़ा रहा जनसैलाब

पांचना बांध मामला।

खण्डीप में पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन किसान महापंचायत एवं धरना सातवें दिन भी पूरे जोश, उत्साह और मजबूती के साथ जारी रहा। धरना स्थल पर कमाण्ड क्षेत्र के हजारों किसान, पंच-पटेल, युवा, महिलाएं एवं बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने हक के पानी की मांग को बुलंद कर रहे हैं। आंदोलन को मिल रहे लगातार बढ़ते जनसमर्थन ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है तथा पूरे क्षेत्र में किसानों के संघर्ष को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप मिलता जा रहा है।

धरना स्थल पर दिनभर किसानों की आवाज गूंजती रही और पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। किसानों का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरकार द्वारा नहरों में पानी नहीं छोड़ना किसानों के साथ अन्याय तथा न्यायालय की भावना के विपरीत है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं निर्णायक बनाया जाएगा।

धरने की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए 11 जून को ग्राम खरेड़ा एवं पावटा के ग्रामीणों ने संपूर्ण व्यवस्थाओं तथा रात्रि प्रवास की जिम्मेदारी अनुशासित एवं व्यवस्थित ढंग से निभाई। वहीं 12 जून से 13 जून तक ग्राम रौंसी, लोटवाड़ा, रोणाली एवं कारवाड़ के ग्रामीण धरना स्थल की व्यवस्थाओं का दायित्व संभालेंगे। विभिन्न गांवों के ग्रामीणों द्वारा बारी-बारी से जिम्मेदारी निभाने से आंदोलन में एकता, अनुशासन और सामूहिक भागीदारी का अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है।

धरना स्थल पर दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जहां लोक गीतकारों एवं कलाकारों ने अपने गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया। महिला कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए लोकगीत ’“चाहे हम मिट जावां, मर जावां, पांचना से नहर लावेंगे”’ ने उपस्थित किसानों में जोश भर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं भी अपने घरों और गांवों से निकलकर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो इस संघर्ष को सामाजिक जनआंदोलन का रूप प्रदान कर रही हैं।

धरना सभा को संबोधित करते हुए विधायक रामकेश मीना ने कहा कि कमाण्ड क्षेत्र का किसान आज अपने अस्तित्व, खेती और भविष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद हजारों किसान पिछले सात दिनों से धरना स्थल पर डटे हुए हैं, लेकिन सरकार किसानों की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को पांचना बांध से उनका हक का पानी नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।

विधायक मीना ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने किसानों के हित में स्पष्ट आदेश दिए हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण कमाण्ड क्षेत्र के लाखों लोगों की आजीविका और कृषि व्यवस्था संकट में पड़ गई है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को गांव-गांव तक विस्तारित कर बड़े जनसंघर्ष का रूप दिया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।

धरना स्थल से किसानों ने एक स्वर में संकल्प दोहराया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करवाकर पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़वाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। किसानों ने स्पष्ट कहा कि अब उनके धैर्य की परीक्षा अधिक समय तक नहीं ली जा सकती। यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि किसानों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है, जिसे हर हाल में जीतकर रहेंगे।

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