a-victim-has-leveled...
गहने चुराकर गोल्ड लोन लेने वाले को बचाने के लिए पुलिस ने केस में लगा दी एफआर
पीड़ित ने लगाया पुलिस पर आरोप
जयपुर पुलिस के ईमान पर सवाल है। चार तोला सोने की चेन लेकर पुलिस वाले एक चोरी के आरोपी को बचा रहे हैं। ये हम नहीं कर रहे, बल्कि मुहाना थाने में दर्ज तीन साल पुराने चोरी के मामले के फरियादी का आरोप है। कहानी एक दगाबाज नौकर और पुलिस की सैटिंग की है। दगाबाज ने अपने ही मालिक को धोखा दिया। मालिक के घर से सोने के लाखों रुपए के जेवर चुराए और गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखकर लोन ले लिया। मालिक को पता चल गया तो माफी मांगने के बहाने घर गया और पूजा करते समय मालिक पर हत्या के इरादे से पीछे से जानलेवा हमला कर दिया। सिर फट गया, 32 टांके आए। जानलेवा हमले के आरोप में तो पुलिस ने नौकर को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन जेवर चुराकर गोल्ड लोन लेने के मामले में पुलिस से उसकी सैटिंग बैठ गई। पुलिस ने सारे सबूतों को दरकिनार कर एफआर लगा दी। फरियादी ने एफआर खुलवाने के लिए प्रोटेस्ट लगाई है।
गोल्ड चेन की 10 साल पुरानी फोटो को नहीं मान रही पुलिस
पीड़ित के पास चोरी हुई ज्वैलरी के फोटोग्राफ और आरोपी द्वारा उन्हीं जेवरों को चुराकर गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखने की रसीद जैसे पुख्ता साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट FR लगा दी। पता चला कि आरोपी इस बीच एक रसूखदार के संपर्क में आ गया, जिसके पुलिस में अच्छे कॉन्टेक्ट्स है। उसने गणित फिट कर दिया और जिस मामले में पहले थानाधिकारी रहे अफसर और उनकी टीम कई महीनों तक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देती रही उसी मामले में थानाधिकारी के बदलते ही पुलिस के सुर बदल गए। अब पुलिस ने एफआर लगा कर फाइल कोर्ट भेज दी।
उच्चाधिकारियों तक शिकायत से पेंच फंस गया
हालांकि फरियादी ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की तो पेंच फंस गया। मामला जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के साउथ जिले में मुहाना थाना इलाके का है। यहां पत्रकार कॉलोनी में रहने वाले राधेश्याम चौधरी को उनके विश्वासपात्र रहे कर्मचारी ने दगा दे दिया। उसके घर से जेवर चुराए और गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखकर लोन ले लिया। चोरी का पता चलने पर उसे बुलाया और बातचीत की तो मौका पाकर राधे पर जानलेवा हमला कर दिया, फिर हमले में घायल राधेश्याम कई दिन हॉस्पिटल में भर्ती रहा और रिवकर होते होने में उसे काफी समय लगा।
जेवर चोरी कर लिए, फिर हमला कर दिया
जब फरियादी को पता चला कि उसके घर से जेवर गायब है। उसने घर, ऑफिस और अन्य जगह काफी तलाश किया तो कार के डैशबोर्ड में एक पर्ची मिली, जिससे पता चला कि उसके जेवर तो दगाबाज नौकर ने गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखकर लोन उठा रखा है। जबकि उसके पास इसके साक्ष्य के तौर पर जेवर खरीदने के बिल और फोटोग्राफ भी थे। उसने दगाबाज के खिलाफ मुहाना थाने में चोरी की एफआईआर नंबर 1492/2023 दर्ज कराई थी। पहले तो पुलिस जेवर चुराकर गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखने के मामले की गंभीरता से जांच कर रही थी, फिर अचानक आईओ बदल गया और थानाधिकारी भी बदल गए। अब मामले में एफआर लगा दी गई।
एफआर लगाने पर आपत्ति
राधेश्याम का आरोप है कि वह तथ्यों की पूरी जांच के बिना एफआर लगाने पर आपत्ति करने थाने गया था। सैकड़ों चक्कर लगाए। उसे इंचार्ज और आईओ ने धमकाकर भगा दिया। उसने एडिशनल कमिश्नर क्राइम से मामले की शिकायत की। राधेश्याम ने अपनी परेशानी थाने से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक को बता दी। उसके पास अपने जेवरों के तमाम फोटो व अन्य साक्ष्य है। साथ ही गोल्ड लोन कंपनी में धोखेबाज द्वारा गिरवी रखने की रसीद भी है, लेकिन थाना स्तर पर उसके साक्ष्यों को नहीं देखा।
पुलिस कमिश्नरेट में गुहार
पुलिस कमिश्नरेट में गुहार लगाते हुए राधे ने मुहाना थाना पुलिस संदिग्ध है। चोरी के मामले में तमाम साक्ष्य होने के बावजूद आरोपी को बचा रहे हैं और उच्चाधिकारियों को भी गुमराह कर रहे हैं।पुलिस ही आरोपी को बचाने में लगी है। थाने में फरियादी की सुनवाई की बजाय डरा-धमकाकर भगा दिया जाता है। इस मामले में वारदात के शिकार राधेश्याम ने जयपुर पुलिस के एडिशनल डीसीपी, डीसीपी साउथ, एडिशनल कमिश्नर क्राइम, पुलिस कमिश्नर जयपुर को शिकायत की है।
यह भी पढ़ें