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बेटी के नाम खदान थी, बाप और बेटे 'बकरा' ढूंढा और खुद गवाह बनकर प्रतिबंधित खान बेच डाली
बाप-बेटा और बेटी तीनों गिरफ्तार
जयपुर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से निरस्त हो चुकी माइनिंग लीज को फर्जीवाड़े से दूसरों को बेचने के मामले में एक बाप-बेटा और बेटी को अरेस्ट किया है। लीज बेटी के नाम पर थी, फर्जीवाड़े से बेचने का कृत्य बाप ने किया और बेटा गवाह बना। फर्जी तरीके से लीज बेचकर 51 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला जयपुर के प्रतापनगर थाने में दर्ज हुआ था। प्रतापगनर थाने में अनसंधान में लापरवाही नजर आई तो अधिकारियों ने सांगानेर थानाधिकारी लिखमाराम को अनुसंधान अधिकारी बनाया था। उन्होंने केस में कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए कुछ ही दिनों में अनुसंधान कंप्लीट करते हुए आरोपी ठग बाप-बेटे-बेटी को गिरफ्तार कर लिया। तीनों उम्रदराज हैं, लेकिन ठगी के मास्टर माइंड हैं, वर्ष 2017 में सीतामाता वन्य जीव सेंचुरी के बफर जोन में आने वाली माइनिंग लीज सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर चुका, इसके बावजूद इस लीज को एक के बाद एक कई लोगों को बेचकर ये धोखे-पर-धोखा कर रहे थे।
बाप-बेटा-बेटी तीनों 51 लाख के फर्जीवाड़े में गिरफ्तार
1. रामचन्द्र बसेर पुत्र स्व. बक्शीराम बसेर उम्र 71 साल जाति महाजन (माहेश्वरी) निवासी राजमहल के पास गांव बांसी पुलिस थाना बडी सादडी, जिला चितौड़गढ़।
2. राजेन्द्र कुमार पुत्र रामचन्द्र बसेर जाति महाजन (माहेश्वरी ) उम्र 44 साल निवासी राजमहल के पास गांव बांसी पुलिस थाना बडी सादडी जिला चितौड़गढ़।
3. चन्दा कुमारी भण्डारी पुत्री रामचन्द्र बसेर पत्नि स्व. चलित कुमार जाति महाजन (माहेश्वरी) उम्र 58 साल निवासी राजमहल के पास बांसी पुलिस थाना बडी सादडी जिला चितौड़गढ़।
अप्रैल माह में दर्ज हुई धोखाधड़ी और कूटरचना की एफआईआर
प्रताप नगर थाने में अप्रैल माह में दर्ज हुई धोखाधड़ी और कूटरचना की एफआईआर में गिरफ्तार इन तीन आरोपियों में से 71 वर्ष का रामचंद्र बसेर को कोर्ट के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में रामचंद्र बेटा बेटी राजेंद्र और चंद्रा को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उनसे जयपुर निवासी मुकेश कुमार से की गई 51 लाख रुपए की धोखाधड़ी की रकम बरामद करने के प्रयास जारी है। पता चला है कि इस ठग फैमिली ने इसी माइनिंग लीज को बेचकर अन्य कई लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की है।
प्रताप नगर थाने में FIR सांगानेर थाना इंचार्ज ने किया अनुसंधान
एफआईआर नंबर 297/26 4 मई को जयपुर ईस्ट के प्रतापनगर थाने में मुकेश कुमार ने दर्ज कराई थी। मामले की जांच में पूर्व प्रताप नगर थानाधिकारी पर अनुसंधान में लापरवाही के आरोप लगे। अफसरों ने अनुसंधान बदलकर सांगानेर थानाधिकारी लिखमाराम को सौंप दिया। लिखमाराम ने कुछ ही दिन में मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए तथ्यात्मक अनंसधान कर मंगलवार को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करा लिया।
सीतामाता वन्य जीव अभ्यारण्य के पास खनन
मामला यूं तो चित्तौड़गढ़ के सीतामाता वन्य जीव अभ्यारण्य के पास स्थित खान का है। लेकिन धोखाधड़ीपूर्वक जयपुर के प्रतापनगर थाना इलाके के निवासी मुकेश कुमार के साथ जयपुर में ही की गई थी। मुकेश जब माइनिंग करने पहुंचे तो उन्हें वन विभाग के अफसरों ने बताया कि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के इको सेंसेटिव जोन में आ जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन पर वर्ष 2017 में ही लीज निरस्त प्रक्रिया शुुरु हो गई थी।
खनन कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य का ईको सेसिटिव जोन के निर्धारण करने के लिए भारत सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 17 अप्रैल 2017 को जारी नोटिफिकेशन के आधार पर अभयारण्य को ईको सेंसिटिव जोन का विस्तारण 0 से 3 किमी तक होने एवं अधिसूचना में उल्लेखित प्रावधानानुसार ईको सेसिटिव जोन में खनन कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित कर दिया। खनन पटटा की ई.सी व कन्सेट टू-आपरेट भी नहीं था, खनिज उत्पादन वर्ष 2017-18 से शून्य है। खनन पट्टा निरस्त कराने के लिए निदेशालय स्तर से निर्णय लिया जाना प्रक्रियाधीन है।