Friday, 17 April 2026

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श्रीकृष्ण परनामी मंदिर राजापार्क में सजीव फूलों से श्री राजी महाराजा का भव्य श्रंगार

महाप्रभु प्राणनाथ जी का पांच दिवसीय प्रगटन उत्सव

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राधाकृष्ण का फूलों से भव्य-दिव्य श्रंगार

जयपुर। श्री कृष्ण परनामी मंदिर, राजापार्क में महाप्रभु प्राणनाथ जी का पांच दिवसीय प्रगटन उत्सव के अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक स्वचालित लाइटों से जगमगा उठा। शनिवार 20 सितंबर को श्री राजी महाराज (राधा कृष्ण) को झूले पर सजीव फूलों से सजाया गया। विशाल लंगर भंडारा का आयोजन किया गया। रविवार 21 सितम्बर को प्राणनाथ जी की वाणी ‘तुम सेवा से पाओगे पार’ के नक्शे कदम पर चलते हुए सुबह 9 बजे से रक्तदान और नेत्रदान शिविर लगाया जाएाग। इस दौरान श्री कृष्ण परनामी मंदिर राजा पार्क में समाजजनों व सामान्य के लिए निःशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर भी लगाया जाएगा। मंदिर परिसर में वाणी गायन, भजन, गुरुजनों के प्रवचन, पारायण की पूर्णाहुति पूजन और भजन-कीर्तन व आरतियां चल रही हैं।


महाप्रभु प्राणनाथजी केप्रगटन उत्सव पर शनिवार को श्री कृष्ण परनामी मंदिर, राजापार्क में श्री राजी महाराज (राधा कृष्ण) को झूले पर विराजित कर सजीव फूलों से शानदार सजावट देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। श्री राजी महाराज के नयनाभिराम व आकर्षक दर्शन हुए। महामती स्वामी श्री प्राणनाथ जी के 408वें प्राकट्य उत्सव पर सुबह विशेष महाआरती की गई। जिसमें सभी गुरुजन और भक्त समुदाय ने शामिल रहा। भजनों पर समाज के छोटे, बड़े सभी महिला-पुरुष और बच्चे नाचते-गाते जयघोष लगाते रहे। सभी एक स्वर में श्री प्राणनाथ प्यारे की जयघोष करते हुए उमंग के साथ अपनी खुशी प्रकट कर रहे थे। समाज के मेधावी छात्रों का मोमेंटो देकर सम्मान किया गया। समाज के बुजुर्गों का भी शाॅल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।

गुरुजनों ने महामती प्राणनाथ जी की जीवनी के बारे में बताया। मंदिर परिसर में भव्य लाइटिंग की गई है। अंधेरा होने पर लोग सजावट देखने भी आए। श्री राजी महाराज की सवारी मंदिर परिक्रमा में निकालेगी। लंगर भंडारे के साथ पांच दिवसीय प्राणनाथ जी प्राकट्य उत्सव संपन्न होगा।

राजापार्क के श्रीकृष्ण परनामी मंदिर में चल रहे पांच दिवसीय प्राकट्य महोत्सव में शुक्रवार तीसरे दिन मुखवाणी, भजन गायन, वाणी चर्चा में श्यामा श्यामा हो, धनी धाम हो, तेरे चरणों में मेरा प्रणाम हो जैसे भजन गाए गए।

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पंचायत के अध्यक्ष ललित भगत ने बताया कि परनामी धर्म के प्रवर्तक महामति श्री प्राणनाथ जी का 408वां प्राकट्य महोत्सव हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जा रहा है। पंजाब जागनी पीठ करनाल धाम के गादीपति जगत राज जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि परब्रम्ह सच्चिदानंद परमात्मा श्री कृष्ण की उपासना श्री कृष्ण परनामी धर्म के अनुयायियों द्वारा की जाती है। चार सदी पहले श्री कृष्ण परनामी धर्म के प्रवर्तक महामति प्राणनाथ जी ने इस संसार के सभी धर्मों का सार तारतम वाणी में बताया कि संसार में सभी धर्म एक हैं उन्होंने मुगल शासक को समझाया कि धर्मों में भेद नहीं कर सभी धर्मों का आदर करें।

;प्राणनाथ जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परम शिष्य महाराजा छत्रसाल को मध्यप्रदेश के पन्ना नामक स्थान से बहुमूल्य रत्न हीरे निकलने का वरदान दिया। पन्ना आज भी हीरे के लिए जाना जाता है। प्राणनाथ जी की कृपा से महाराज छत्रसाल ने मुगलों से 52 लड़ाइयां लड़ीं और सभी में विजय प्राप्त की ।

पदमावती पुरी धाम के देवकरण जी महाराज ने कहा कि परनामी संप्रदाय के 40 लाख से अधिक अनुयायी श्री राज श्यामा जी की भक्ति करते हैं। परनामी मंदिरों में तारतम वाणी ग्रंथ दर्शनों के लिए विराजमान होते हैं जिन पर मोर मुकुट, बांसुरी और मुकुट धारण किए होते हैं। इन्हीं के वांग्मय स्वरूप की पूजा होती है।उनका दिव्य संदेश है कि तुम प्रेम और सेवा से पाओगे पार। धर्म अलग-अलग हैं परन्तु सभी का सार एक ही है, धनी एक ही है।

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