Saturday, 1 August 2026

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RGHS में खेल करने वाले 7 डॉक्टर निलंबित, अस्पताल-डायग्नोस्टिक सेंटर पर FIR

राजस्थान गवर्मेंट हेल्थ स्कीम में बड़ा घोटला, आरजीएचएस में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई

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धांधली की स्कीम बनती जा रही आरजीएचएस

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में फिर बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है। योजना में अनियमितताएं करने वाले 7 और चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। साथ ही, एक अस्पताल एवं एक डायग्नोस्टिक सेंटर के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना के सुचारू संचालन की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में ऑडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थापित चिकित्सकों को निलंबित किया गया है।

ये सात डॉक्टर निलंबित

  1. डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, अस्थि रोग सह आचार्य मेडिकल कॉलेज सीकर
  2. डॉ. सुनील कुमार ढाका, मेडिकल कॉलेज सीकर
  3. डॉ. मुकेश वर्मा, जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य ,मेडिकल कॉलेज सीकर
  4. डॉ.राकेश कुमार, सीएचसी किरवा सीकर
  5. डॉ.गजराज सिंह, श्री कल्याण (SK) अस्पताल सीकर
  6. डॉ. एसएस राठौड़, एसके अस्पताल सीकर
  7. डॉ. सुनील शर्मा,एसके अस्पताल सीकर को निलंबित किया गया है।

इसी प्रकार योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम तथा बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एण्ड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

लाभार्थियों के कार्ड का दुरूपयोग कर उठाए फर्जी क्लेम 

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुंचाई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की डॉ. संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया। दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुंची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब FIR की कार्रवाई की जा रही है।

बिना जरूरत की गई जांचें

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर, बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।

चिकित्सकों के नाम एवं सील फर्जी

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम एवं सील दर्शाए गए हैं, उनमें से कई पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था। 

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