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यह प्रतिष्ठित पहल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित है और इसका उद्देश्य देशभर के शिक्षकों को अनुभवी विशेषज्ञों से जोड़कर उनकी पेशेवर क्षमता को सुदृढ़ करना है।
शिव प्रसाद शुक्ला
गोरखपुर। शिक्षा एवं सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में गोरखपुर ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। प्रख्यात समाजसेवी, युवा नेतृत्वकर्ता एवं यूथ पॉवर एसोसिएशन (YPA) के संस्थापक-अध्यक्ष शिव प्रसाद शुक्ला को भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय मिशन फॉर मेंटरिंग (एनएमएम) में मेंटर के रूप में चयनित किया गया है। यह प्रतिष्ठित पहल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित है और इसका उद्देश्य देशभर के शिक्षकों को अनुभवी विशेषज्ञों से जोड़कर उनकी पेशेवर क्षमता को सुदृढ़ करना है।
यह चयन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूर्वांचल और गोरखपुर के लिए गौरव का विषय है। शिव प्रसाद शुक्ला पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके नेतृत्व में यूथ पॉवर एसोसिएशन ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास तथा सामुदायिक नेतृत्व निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। संस्था द्वारा 1000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों, सैकड़ों कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों युवाओं को प्रशिक्षित कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर किया गया है।
राष्ट्रीय मिशन फॉर मेंटरिंग का उद्देश्य कार्यरत शिक्षकों की क्षमता वृद्धि (कैप्सिटी बिल्डिंग), कौशल उन्नयन (अप् स्किलिंग) एवं नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इस मिशन के माध्यम से देशभर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। शिव प्रसाद शुक्ला का चयन उनके सामाजिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और युवाओं के साथ दीर्घकालिक कार्य के आधार पर किया गया है।
उन्हें उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त “विवेकानंद यूथ अवार्ड” सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
इस अवसर पर शिव प्रसाद शुक्ला ने कहा, “एक सशक्त शिक्षक ही सशक्त भारत की आधारशिला है। शिक्षकों का मार्गदर्शन करना राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी है। यह मेरे लिए सम्मान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दायित्व है।”
उनकी यह उपलब्धि न केवल शिक्षा क्षेत्र में बल्कि सामाजिक नेतृत्व की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण है। गोरखपुर और पूर्वांचल के युवाओं के लिए यह संदेश है कि समर्पण, निरंतर प्रयास और सामाजिक प्रतिबद्धता से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
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