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शून्य से शिखर: विजिटिंग कार्ड छापने से शुरू किया था सफर, आज 3,500 से अधिक लोगों को दे रहे हैं रोजगार
'राइजिंग राजस्थान' और सरकारी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की सराहना की
आज के दौर में जहां अक्सर पारिवारिक विवादों और संपत्ति के झगड़ों की खबरें सुर्खियाँ बनती हैं, वहीं राजस्थान के तीन सगे भाइयों-हेमेंद्र अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अमित अग्रवाल तीनों भाइयों आपसी एकता और कड़ी मेहनत की एक अनूठी मिसाल पेश की है। कभी जेब में महज 500 रुपये लेकर विजिटिंग कार्ड और टाइपिंग का काम शुरू करने वाले इन भाइयों ने आज 1100 करोड़ रुपये का विशाल औद्योगिक साम्राज्य खड़ा कर दिया है।
चमत्कार से मिला 'मिरेकल' नाम
अपनी सफलता की कहानी बयां करते हुए भाइयों ने बताया कि शुरुआत में जब वे टेलीकॉम सेक्टर में पोस्टर और मेटल सप्लाई करते थे, तो जिस काम में बाजार में 15 से 20 दिन लगते थे, वे उसे महज दो से तीन दिनों में पूरा कर देते थे। ग्राहकों के मुंह से अक्सर निकलता था-"यह तो मिरेकल (चमत्कार) है!" बस यहीं से उनकी कंपनी का नाम 'मिरेकल' पड़ा।
विजिटिंग कार्ड से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पैकेजिंग, लेबल प्रिंटिंग, कॉरुगेटेड बॉक्सेस और प्लास्टिक कैन निर्माण तक पहुँच गया। आज देश की 500 से अधिक बड़ी कंपनियाँ इनसे जुड़ी हुई हैं।
3,500 से अधिक युवाओं को रोजगार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "नौकरी लेने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनो" के विचार को साकार करते हुए इस कंपनी ने वर्तमान में 3,500 से अधिक युवक-युवतियों को रोजगार दिया है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 3,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना और 8,000 लोगों को रोजगार से जोड़ना है। कंपनी में महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संस्थापकों का मानना है कि महिलाओं में काम के प्रति स्थिरता और समर्पण अधिक होता है।
'राइजिंग राजस्थान' और प्रशासन का सहयोग
राजस्थान सरकार की नीतियों और 'राइजिंग राजस्थान' पहल की तारीफ करते हुए हेमेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पिछले 15 सालों में पहली बार उन्हें प्रशासनिक स्तर पर इतना त्वरित (Quick) रिस्पॉन्स मिला है। बीआईपी (BIP) की टीम और अधिकारी फाइलों का स्टेटस जानने के लिए खुद संपर्क करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिनकी नीयत काम करने की है, सरकार उनका पूरा सहयोग कर रही है।
पर्यावरण संरक्षण और युवाओं को संदेश
पर्यावरण के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) निभाते हुए कंपनी 60 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक का उपयोग नहीं करती। साथ ही ईपीआर (EPR) प्रणाली के तहत जितना प्लास्टिक इस्तेमाल होता है, उतने कचरे को रीसायकल भी किया जाता है।
युवाओं के लिए संदेश
"बाजार में गैप (कमी) को पहचानना सीखें। स्क्रैप और वेस्ट मैनेजमेंट बहुत बड़ा बिजनेस है। कचरे को सही तरीके से यूटिलाइज करके भी बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है। बस मन में विश्वास, ईमानदारी और परिवार का साथ होना चाहिए।"
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